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मार्च 16, 2022
मुठभेड़ मार्च 16, 2022

यह है आपके साहस को परखने का पैमाना…

कैलिफ़ोर्निया के ऊंचे रेगिस्तान में छिपे एक मठ में भर्ती लेने से पूर्व, मैं स्किड रो की सीमा, लॉस एंजिल्स शहर के मुख्य मार्ग पर पांचवीं गली में रहता था। लॉस एंजिल्स शहर की एक अप्रिय खासियत यह है कि यहाँ बड़े पैमाने पर लोग बेघर हैं। अपनी बदकिस्मती से भागकर बहुत से लोग दूर-दूर से आते हैं। यहाँ सर्दियां कम प्रतिकूल होती हैं, इसलिए सड़कों पर घूम फिरकर ज़िन्दगी बसर करने के लिए और भीख मांगकर अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठने के लिए लोग अक्सर ग्रे हाउंड बस के एक तरफ़ा टिकट के माध्यम से यहाँ पहुँचते हैं। इन व्यक्तियों के दैनिक जीवन की निराशा को देखे बिना शहर के कुछ हिस्सों को पार करना असंभव है। लॉस एंजिल्स शहर में बेघरों की संख्या बड़ी होने के कारण आर्थिक और सामाजिक तौर पर अधिक भाग्यशाली लोगों के अन्दर ऐसी भावना रहती है कि वे कभी भी इस समस्या को दूर नहीं कर सकते हैं, इसलिए वे शहर के 41,290 की बेघर आबादी के अस्तित्व को ही नकारने की रणनीति को अपनाकर अपनी आंखों के संपर्क से उनसे बचने की कोशिश करते हैं।

एक व्यक्ति अपने मिशन पर

एक दिन मैं ग्रैंड सेंट्रल मार्केट में एक दोस्त के साथ दोपहर का भोजन कर रहा था। हमारे भोजन के दौरान उन्होंने अप्रत्याशित रूप से मुझे आलिशान और विलासी बोनावेंचर होटल के एक कमरे की चाबी सौंप दी, और मुझसे बोला कि यह कमरा अगले कुछ हफ्तों तक आनंद लेने के लिए तुम्हारा होगा! बोनावेंचर लॉस एंजिल्स का सबसे बड़ा होटल था, जिसमे एक आकाशकीय रेस्तरां था जो उस होटल के सबसे ऊपरी मंजिल पर घूमता रहता था। यह मेरे कार्य स्थल के  स्टूडियो अपार्टमेंट से केवल दस मिनट की पैदल की दूरी पर था। मुझे एक फैंसी होटल के कमरे की कोई ज़रूरत नहीं थी, लेकिन मैं जानता था कि शहर में ऐसे 41,290 व्यक्ति हैं जिनको रात बिताने के लिए बिस्तर की ज़रूरत थी। मेरी एकमात्र दुविधा यह थी कि मेरे लिए दिए जा रहे उस कमरे में आश्रय प्राप्त करने वाले एकल व्यक्ति का चयन मुझे कैसे करना चाहिए? मैं सुसमाचार के उस सेवक की तरह महसूस कर रहा था, जिसे उसके स्वामी ने “शीघ्र ही नगर के बाज़ारों और गलियों में जाकर कंगालों, लूलों, अंधों और लंगड़ों को यहाँ बुला” लाने के लिए नियुक्त किया था (लूकस 14:21)।

जब मैं उस दिन की ड्यूटी करके निकला था, तो आधी रात बीत चुकी थी। मेट्रो स्टेशन के बाहर खाली सड़क पर स्केटिंग करते हुए निकलते ही मैंने अपना “शिकार” शुरू किया। मैं ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि वह जिस व्यक्ति को इस सौभाग्य का आशीर्वाद देना चाहता है उस व्यक्ति को चुनकर मुझे दिखावे। गली-मोहल्लों में झाँकते हुए, मैं अपने स्केटबोर्ड पर शहर में घूमता रहा, और कोशिश कर रहा था कि लोग मुझे किसी रहस्यमय मिशन पर निकला आदमी की तरह नहीं पहचानें । मैं लॉस एंजिल्स कैफे की ओर रवाना हुआ, मुझे विश्वास था कि मुझे वहां कोई ज़रूरतमंद मिल जाएगा। निश्चित रूप से मैंने दुकान के सामने फुटपाथ पर बैठे एक आदमी को देखा। वह बूढ़ा और दुबला पतला था, दाग से सना हुआ सफेद टी-शर्ट के अन्दर उनके कन्धों की हड्डियां साफ़ झलक रही थी। मैं कुछ फीट दूर बैठ गया। “नमस्कार”, मैंने उनका अभिवादन किया। उन्होंने जवाब दिया: “हाय”। मैंने पूछ लिया: “सर, क्या आप आज रात सोने के लिए जगह ढूंढ रहे हैं?” उन्होंने पूछा: “क्या?” मैंने दोहराया: “क्या आप सोने के लिए जगह ढूंढ रहे हैं?” अचानक वह चिढ़ गया और पूछने लगे: “क्या तुम मेरा मज़ाक उड़ाने की कोशिश कर रहे हो? मैं यहाँ जैसा हूँ, वैसा ठीक हूं। मुझे अकेला छोड़ दो!”

इस जवाब से मैं हतप्रभ था। उन्हें अपमानित करने के लिए खेद महसूस करते हुए, मैंने माफी मांगी और निराश होकर वहां से खिसक गया। यह मिशन मेरी अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन होगा। आखिरकार, यह आधी रात के बाद का वक्त था, और मैं इस मिशन से पूरी तरह से अजनबी था। शायद मैं असंभव जैसी बात को संभव होने का दावा कर रहा था। लेकिन, मैंने सोचा कि हालात मेरे पक्ष में है। मेरा प्रस्ताव ठुकराया जा सकता है, ठीक उसी तरह जैसे उस महान भोज के दृष्टांत में नौकर के साथ हुआ था। लेकिन देर-सबेर कोई न कोई मेरे निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए बाध्य होगा। एकमात्र सवाल यह था कि इसमें कितना समय लगेगा? पहले ही देर हो चुकी थी, और मैं सुबह से आधी रात के काम के बाद थक गया था। मैंने सोचा कि शायद मुझे कल फिर से कोशिश करनी चाहिए।

अज्ञात जगह पर

स्केटिंग और प्रार्थना करते हुए, मैंने विभिन्न शरणार्थियों को निहारते हुए, उस कंक्रीट के जंगलनुमा शहर से अपने  रास्ते पर आगे बढ़ रहा था। रास्ते में एक नुक्कड़ पर व्हीलचेयर में अकेले बैठे हुए एक आदमी की छाया आकृति मैंने देखी। वह आधा सोया हुआ और आधा जागता हुआ दिखाई दिया, जैसा कि सड़कों पर रहनेवाले कई लोग करते हैं। उसे परेशान करने में मैं हिचकिचा रहा था, इसलिए मैं उसके पास पहुँच कर सावधानी से तब तक खडा रहा जब तक उसने अपनी थकी हुई आँखों से मेरी ओर नहीं देखा। “क्षमा करें सर,” मैंने कहा, “मेरे पास बिस्तर के साथ एक कमरा उपलब्ध है। मुझे पता है कि आप मुझे नहीं जानते हैं, लेकिन अगर आप मुझ पर भरोसा करते हैं तो मैं आपको वहां ले जा सकता हूं।” बिना भौंह उठाए उसने ‘हाँ’ करते हुए अपना सिर हिलाया। “बहुत अच्छा। आपका नाम क्या है?” मैंने पूछ लिया। उसने जवाब दिया, “जेम्स” ।

मैंने जेम्स को मेरा स्केटबोर्ड पकड़ने के लिए कहा, और उसे उसकी व्हीलचेयर में धकेलते हुए साथ साथ हमने बोनावेंचर के लिए प्रस्थान कर लिया। जैसे-जैसे हमारा परिवेश सभ्य होता गया, उसके चेहरे पर सतर्कता के भाव आने लगे। उसे अंधेरे के बीच में से धकेलते हुए, मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसकी पीठ रेत से ढका हुआ है। तब मुझे एहसास हुआ कि रेत आगे पीछे बह रही थी। लेकिन प्रकाश में आते ही मैं ने पाया कि यह रेत बिल्कुल नहीं था, बल्कि हजारों छोटे छोटे कीड़े थे।

पञ्च सितारे होटल लॉबी में प्रवेश करते हुए, सारे के सारे लोग जेम्स और मुझे स्तब्ध और सदमे के भाव से देख रहे थे। उन सब से नज़रें मिलाने से बचते हुए, हम एक आलीशान फव्वारे के बगल से गुजरे, एक शीशे की लिफ्ट में सवार हुए, और कमरे में पहुँचे। जेम्स ने पूछा कि क्या वह स्नान कर सकता है। मैंने उसे बाथरूम के अंदर ले जाकर स्नान करने में उसकी मदद की। एक बार सफाई होने के बाद, जेम्स आराम से सफेद चादरों के बीच लेट गया और तुरंत सो गया। उस रात जेम्स ने मुझे एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया: परमेश्वर का निमंत्रण अक्सर अप्रत्याशित रूप से आता है , और वह निमंत्रण हमसे विश्वास के एक ऐसा अनुपात की मांग करता है जो आमतौर पर हमें असहज करता है। कभी-कभी हम उसके निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए तैयार होने के पहले, हमें स्वयं को ऐसी स्थितियों में ढालना चाहिए जिसमें खोने के लिए कुछ भी न हो। और अक्सर, दूसरों के लिए आशीषें लाने में ही हम वास्तव में आशीष पाते हैं।

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By: Brother John Baptist Santa Ana, O.S.B.

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मार्च 16, 2022
मुठभेड़ मार्च 16, 2022

क्रिसमस का जादू मुझे हमेशा मंत्रमुग्ध कर देता है, चाहे क्रिसमस काल को अनुभव करने से पहले मुझे कितनी ही दुख तकलीफों का सामना करना पड़े। कई साल ऐसे होते हैं जिसमे हम क्रिसमस का उत्साह और खुशी त्योहार गुज़रने के बाद अनुभव करते हैं। लेकिन एक बार जो क्रिसमस का उत्साह हम पर चढ़ जाता है, तो फिर वह उतरने का नाम नहीं लेता है।

परमेश्वर के इकलौते पुत्र को उपहार स्वरूप प्राप्त करने से हमें जिस आनंद का अनुभव होता हैं, वही इस अद्भुत त्योहार की नीव रखता है। इसी कारण से थोड़े समय के लिए ही सही, पर इस प्यारे जश्न के मौसम में सब से अच्छे से पेश आना हमारे स्वभाव का एक अभिन्न हिस्सा बन जाता है। क्योंकि छोटे बच्चों के लिए, सैंटा क्लॉज से तोहफे मिलने की उम्मीद उन्हें अपना आचरण सुधारने की प्रेरणा देती है, इसीलिए मैं यह अक्सर सोचा करती हूं कि इस त्योहार में ऐसा क्या है जिसकी वजह से हम वयस्क लोग भी अपने आचरण को सुधारने के लिए प्रेरित होते हैं और हम किस तरह से साल के बाकी दिनों में भी अच्छाई के प्रति उस झुकाव को कायम रख सकते हैं जिसे हम क्रिसमस के इस जादुई मौसम में अनुभव करते हैं।

एक गहरी यादगार

पिछले साल मैंने और मेरे पति ने विक्टोरिया नामक जगह की यात्रा की। वहां हम एक बेर के खेत में गए जहां की फसल खरीदते हुए हमने वहां की मालकिन से बात की। गर्मी के मौसम में भी वह दिन काफी शीतल था, और हम इस बारे में बात कर रहे थे कि पिछले साल का मौसम कितना भयंकर था। पिछले साल सूखा पड़ने की वजह से और जंगल में आग लगने की वजह से किसानों और फसलों की हालत बहुत बुरी थी। क्योंकि खेत की मालकिन आग बुझाने में भी मदद करती थी, उन्होंने आग बुझाते हुए कई करीबी दोस्तों को खोने का दुख भी झेला था।

इस दुखभरी बात को सुन कर मुझे तब और दुख हुआ जब खेत की मालकिन ने कहा कि “इस बार भी मैं आग से लड़ने के लिए पूरी तैयारी करके बैठी हूँ”। जब हम खेत से बाहर जा रहे थे, तब उसने अपने बच्चे को उठाया और उन दोनों ने हमें अलविदा कहा। खेत की यात्रा बेशक हमारी यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा था और हमने वहां के लोगों में जो दृढ़ संकल्प देखा, वह हमें इस बात की याद दिलाता रहेगा कि किस तरह हमें तब अच्छाई करनी चाहिए जब हमसे इसकी उम्मीद की जाती है – चाहे साल का कोई भी समय हो।

छोटे छोटे कदम

एक बार जब हम दिसंबर में क्रिसमस की खुशी और नए साल के आने के उत्साह से गुज़र चुके होते है, तो हमें अच्छाई करने की ओर अपने मन को झुकाने के लिए थोड़ा ज़्यादा प्रयास करना पड़ सकता है। मैं आमतौर पर देखती हूं कि हमारी व्यस्तता हमारे जीवन को निर्देशित करने लगती है और व्यस्तता की गति थमने की कोई जगह दिखाई देनी बंद हो जाती है। जैसे-जैसे हमारे व्यवसायिक और व्यक्तिगत प्राथमिकताएँ हमारा ध्यान अपनी ओर खींचने लगती है, मैं सोचने लगती हूं कि कि क्या मैं ईश्वर के निर्देशों के प्रति उतनी ही सचेत रह सकती हूँ जितनी सचेत मैं तब होती हूं जब मैं क्रिसमस के मौसम में उपहार लपेटते और क्रिसमस भजन गाते समय होती हूं।

हालांकि, हमारे प्रभु कभी भी अपनी गति को धीमा नहीं करते हैं – वे कभी संघर्ष कर रहे स्थानीय व्यवसाय की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं, तो कभी हमें किसी ऐसे व्यक्ति को फोन करने की याद दिलाते हैं जो अकेला है, वे हमें क्षमा करने के लिए प्रोत्साहित करते है, और हमें दान देने के लिए प्रेरित करते है। मेरे पति कहते हैं कि ईश्वर की यह प्रेरणाएं ही हमें उनके नज़दीक लाने का मार्ग बनती है। मैं उन्हें ईश्वर की ओर बढ़े छोटे छोटे कदमों के रूप में देखती हूं जिन्हें प्राप्त करने से हम आशीष पाते हैं।

अगर हम अपनी व्यस्तता को दूर करने का बंदोबस्त भी कर लें, तो भी हमारे जीवन में अक्सर दूसरी बाधाएं होती हैं जो हमें ईश्वर के संकेतों का जवाब देने से निराश करती हैं। उदाहरण के लिए, जब हम किसी की मदद की पुकार सुनते हैं, तो हम यह तर्क देने लगते हैं कि हमारे योगदान से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा या मदद मांगने वाले इंसान को शायद हमारी मदद लेना पसंद ना आए। या हम किसी व्यक्ति के साथ पुरानी दुश्मनी सुलझा लेने का ईश्वरीय संकेत यह सोच कर टाल देते हैं कि उसकी किसी नई बात ने हमें ठेस पहुंचाई है।

एक अच्छी लड़ाई लड़ें

इन सब बाधाओं के बावजूद, ईश्वर की बातें, उनकी सलाह हमारे दिल में चुभती रहती है। पर ऐसा क्यों होता है, क्या आपने कभी सोचा है? ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि येशु ने हमारे अंदर के और बाहर के अंधकार को जीत लिया है। उनका प्रेम और उनका प्रकाश तेज़ी से जलता है, और हमेशा के लिए अच्छाई की चिंगारी को प्रज्वलित रखता है। यदि हम ईश्वर की अच्छाई के करीब आना चाहते हैं तो हमें उनके संकेतों पर अमल करना चाहिए। जैसा कि हमारी प्रिय फातिमा की मां मरियम ने हमें याद दिलाया था, कि हमारा भविष्य ईश्वर में है और हम उस भविष्य को बनाने के सक्रिय और जिम्मेदार भागीदार हैं।

अगर हम यह याद रखें कि हमारे साथ जो कुछ भी अच्छा हुआ है, जो भी प्रतिभाएं और आशीर्वाद हमें मिले हैं, वे सब प्रभु की ओर से हैं, तो हम अपने मन में आने वाले अच्छाई के प्रति हर झुकाव का स्वेच्छा से स्वागत करेंगे। आज के ज़माने में यह और भी जरूरी हो गया है कि हम अंधेरे से लड़ें, और मां मरियम से प्रार्थना करें कि वह हमें ध्यान केंद्रित करने और बुलाए जाने पर अच्छी लड़ाई लड़ने में मदद करें। किसी के जीवन को रोशन करने में, उन तक क्रिसमस की आशा और खुशी लाने में ज़्यादा समय नहीं लगता है। जब उन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है, खासकर तब जब उन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। चाहे वह क्रिसमस के त्योहार का मौसम हो या वर्ष का कोई अन्य समय हो।

“जिसका सामर्थ्य हम में क्रियाशील है और जो वे सब कार्य संपन्न कर सकता है, जो हमारी प्रार्थना और कल्पना से परे है, उसी की महिमा कलीसिया में और येशु मसीह में पीढ़ी दर पीढ़ी, युग युगों तक होती रहे! आमेन! (एफिसियों 3:20-21)

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By: Michelle Harold

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अक्टूबर 27, 2021
मुठभेड़ अक्टूबर 27, 2021

जब मैं पंद्रह साल की थी तब मेरे पिताजी का देहांत हुआ  और मैंने खुद को बड़ी ही निराशाजनक अवस्था में पाया। एक रात जब मैं प्रार्थना कर रही थी, तब मैंने ईश्वर को बड़ी गहराई से पुकारा, क्योंकि मुझे उनकी मदद की ज़रूरत थी। और ईश्वर ने मेरी प्रार्थना का उत्तर दिया। मैंने ईश्वर को एक दर्शन में देखा। पहले तो मैं आश्चर्यचकित रह गई क्योंकि इससे पहले मैंने कभी कोई दैविक दर्शन नही देखा था। येशु ने मेरी प्रार्थना का उत्तर इस दर्शन द्वारा दिया, जिसमे मैंने उन्हें बाहें खोले, कांटों का मुकुट पहने, प्रज्वलित हृदय के साथ देखा। उन्होंने ना कुछ कहा, ना कुछ किया, फिर भी उनकी उपस्थिति ने मुझे बहुत प्रभावित किया। यह पहली बार था जब मैंने येशु को अपने इतना करीब महसूस किया।

अब मैं पीछे मुड़ कर देखती हूं तब मुझे यह अहसास होता है कि उस दर्शन में मैंने जो कुछ देखा था, वह मेरे ही जीवन को दर्शाता था। कांटो का वह मुकुट उस पीड़ा को दर्शाता था जिससे मैं उस वक्त गुज़र रही थी, और येशु का प्रज्वलित हृदय, ईश्वर का मेरे प्रति महान प्रेम का चिन्ह था। अब जब भी मैं उस दर्शन को याद करती हूं, येशु की खुली बाहों वाली छवि मुझे इस बात का स्मरण कराती हैं कि अंत में सब ठीक हो जाएगा क्योंकि येशु हमेशा मेरे साथ हैं।

क्योंकि मैं एक कैथलिक परिवार में पली बढ़ी थी, इसीलिए मेरे लिए इस विश्वास के साथ जीना आसान था। रोज़ मिस्सा बलिदान में भाग लेना हमारी दिनचर्या का हिस्सा था। लेकिन जब मैं अंग्रेज़ी पढ़ाने के लिए दक्षिणी अफ्रीका गई, तब मुझे ग्रामीण क्षेत्रों में रहना पड़ा जहां रविवार का मिस्सा भी उपलब्ध नही होता था। इस परिस्थिति ने मुझे इस बात का अहसास दिलाया कि मुझे यूखरिस्त की उपस्थिति और परम प्रसाद ग्रहण करने के अवसरों के लिए कितना आभारी होना चाहिए।

जब मैं अंग्रेज़ी पढ़ाने अल्बानिया गई, तब वहां मुझे एक कॉन्वेंट में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जहां पवित्र संस्कार की आराधना हर रोज़ हुआ करती थी। इस दिनचर्या ने यूखरिस्त की आराधना के प्रति मेरे प्रेम को स्थापित किया और पवित्र यूखरिस्त के प्रति मेरे प्रेम को और भी गहरा किया। आराधना के इन्हीं पलों में मैंने अपना हृदय ईश्वर के लिए खोला और उनसे अपनी सारी भावनाओं को साझा किया।

लोग मुझसे अक्सर यह सवाल करते हैं कि मैं इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकती हूं कि येशु पवित्र यूखरिस्त में उपस्थित है? मैं उनसे कहती हूं कि मैं ईश्वर की उपस्थिति को महसूस कर सकती हूं। ईश्वर की उपस्थिति, उनकी गर्माहट और उनका प्रेम मुझे चारों ओर से घेर लेता है। आराधना मेरे जीवन का एक अहम भाग है, क्योंकि यह मुझे ईश्वर की बातों और उनकी योजनाओं को सुनने का अवसर प्रदान करता है। जितना मैं ईश्वर की बातों को सुनती हूं, उतना मैं, मेरे जीवन के लिए ईश्वर के निर्धारित उद्देश्यों को पहचान पाती हूं।

जब मैं विश्वविद्यालय में थी, तब मैं रियो डि जेनेरियो के कोपाकाबाना समुद्र तट गई। वहां मैंने विश्व युवा दिवस के एक समारोह में भाग लिया, जो कि अपनेआप में एक अद्भुत अनुभव था। वहां चालीस लाख लोगों ने एक साथ सागर तट पर आराधना की। समुद्र की लहरें एक तरफ हो गईं, सूरज की रौशनी हमारे सर पर थी, और जब पवित्र यूखरिस्त को ऊंचा उठाया गया, मैं भावविभोर हो उठी। येशु की महिमा और उनकी अदृश्य उपस्थिति को अनुभव करना अद्भुत था। उस वक्त, वहां जब मैं लाखों लोगों के बीच, सर को झुकाए अपने घुटनों पर थी, मुझे मेरे सर से जीवन भर का बोझ उतरता सा महसूस हुआ, और मैं ईश्वर के और भी करीब आ गई।

बीते कुछ सालों में मेरा येशु से रिश्ता और गहरा हुआ है, और अब मेरा जीवन पवित्र यूखरिस्त के इर्द गिर्द घूमता है। मैंने अपने जीवन की हर परेशानी, हर परीक्षा में यह सीखा है कि येशु हमेशा मेरे साथ हैं। चाहे वह मिस्सा बलिदान हो, आराधना हो, या मेरी रोज़ की व्यक्तिगत प्रार्थना, मुझे हमेशा ईश्वर की अद्भुत, चमत्कारी उपस्थिति को अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

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यह लेख उस गवाही पर आधारित है जो रेबेका ब्रैडले ने शालोम वर्ल्ड प्रोग्राम केएडोरनामक कार्यक्रम में दी थी। पूरे एपिसोड को देखने के लिए shalomworld.org/show/adore पर जाएं।

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By: Rebecca Bradley

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